1857 की क्रांति-1857 Ki Kranti

1857 की क्रांति-1857 Ki Kranti

भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ, उस आजादी की प्रथम नीव सन 1857 में डाली गयी थी जिसको प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नाम  भी जाना जाता है।17 वीं  शताब्दी में अंग्रेज भारत व्यापर के लिए आये तथा धीरे-धीरे व्यापार के  साथ उन्होंने भारत पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया। उन्होंने यहां के राजाओ को हराकर तथा कूटनीति से सम्पूर्ण भारत में कब्ज़ा कर लिया। यह 1857 की क्रांति  भारत में किसी भी आक्रमणकारी के खिलाफ की गयी पहली क्रांति थी जिसको बहुत सारे नामो से जाना जाता है, चूँकि यह भारतीय सैनिको द्वारा प्रारम्भ की गयी थी, इसलिए इसे अंग्रेज इतिहासकारो द्वारा सैनिक विद्रोह के नाम से भी जाना जाता है।
1857 Revolt


1857 की क्रांति के कारण  - इतिहासकारो द्वारा अपनी पुस्तको में  इस क्रांति के अलग अलग कारणो  का उल्लेख किया है परन्तु सभी कारणों, भले ही वो राजनितिक हो, आर्थिक हो, सामाजिक अथवा धार्मिक हो या तत्कालीन हो सभी में  उनके द्वारा बनाई गयी नीतियों की वजह से आक्रोश की स्थिति उत्पन्न हुई. यह आक्रोश धीरे-धीरे बढ़ता गया।  यह आक्रोश सन 1857 ई० में फूटा जब जनवरी 1857 में दमदम में सैनिको के बीच यह अफवाह फ़ैल गयी की कारतूसों मै  गाय अथवा सुवर की चर्बी का इस्तेमाल किया जाता है जिसे भरने के लिए मुँह में डालना पड़ता था,  यह बात धीरे धीरे अन्य जगह भी फैलने लगी तथा सैनिक उन कारतूसों को भरने के लिए मना करने लगे।  29 मार्च को बैरकपुर  की 34 छावनी के एक सैनिक जिसका नाम मंगल पांडे था ने इन कारतूसों को भरने से मना कर दिया और 2 अंग्रेज अधिकारियो की गोली मारकर हत्या कर दी।  जिसके लिए  ०8 अप्रैल को मंगल पांडे को फांसी दे दी गयी जिससे यह विद्रोह और अधिक फ़ैल गया, 10 मई को मेरठ में सैनिको ने छावनी पर हमला कर वहां के शस्त्रागार से शस्त्र निकाल कर दिल्ली की ओर प्रस्थान किया तथा बाहदुर शाह को इस क्रांति का नेता चुन लिया चुकि वह बूढ़े हो चुके थे इसलिए इस क्रांति की कमान उनके सेनापति बख्त खां ने संभाल ली।

परिणाम -यह क्रांति पूर्ण रूप से असफल हुई जिसका कारण था इस क्रांति में सहयोग की कमी, भारत के जिस  जिस हिस्से मै क्रांति हुई सबको अंग्रेजो द्वारा दबा दिया गया। दक्षिण भारत ने इस क्रांति में हिस्सा नहीं लिया। इस  क्रांति के राजनितिक परिणाम स्वरुप भारत मे  कम्पनी का शासन खत्म हुआ तथा ब्रिटिश राज शुरू हुआ।

मुख्य क्रांति स्थल तथा लीडर-
       1.        दिल्ली        -            बाहदुर शाह
       2.        लखनऊ     -            बेगम हज़रत महल
       3.        कानपुर      -             नाना साहेब (धोंदू पंत )
       4.        ग्वालियर    -             तात्याटोपे (रामचंद्र पांडुरंग )
       5.        झाँसी         -             रानी लक्ष्मीबाई (मनु )
       6.        बिहार        -             बाबू कुंवर सिंह
       7.        इलाहबाद  -             लियाकत अली
       8.        बरेली        -             खां  बहादुर खां 

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