भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस - Indian National Congress (1885)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस - Indian National Congress (1885)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress )

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत की एक राजनैतिक पार्टी है, जिसकी स्थापना सन 1885 में एलन ऑक्टेवियन ह्यूम ने की थी। भारत की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कई क्रांतिकारियो ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़कर कई अंग्रेज विरोधी आंदोलनों को अंजाम दिया। भारत में वर्तमान की दो बड़ी राजनैतिक पार्टियाँ में एक कांग्रेस तथा दूसरी भारतीय जनता पार्टी है। 


Bhartiya rastriya congress
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 

ए ओ ह्यूम के नेतृत्व में 1885 में एक संस्था का गठन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की पड़ी लिखी जनता को भारतीय सत्ता में हिस्सेदारी दिलाना था, तथा एक ऐसे मंच का गठन करना था, जिससे भारत और अंग्रेजो के बीच भारतीय नागरिको और भारतीय राजनीति की वार्ता हो सके।  देखा जाए तो यह  कुलीन वर्ग हेतु बनाई गयी संस्था थी। प्रारम्भ में इसका अधिवेशन पूना में तय किया गया, परन्तु बाद में हैजा की समस्या के कारण इसका पहला अधिवेशन बॉम्बे (मुंबई) में किया गया। जिसमे 72 प्रांतो के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, तथा व्योमेश चंद्र बनर्जी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress ) का प्रथम अध्यक्ष नियुक्त किया गया। और इस प्रकार एक रजनीतिक पार्टी का निर्माण हुआ, जिसमे भविष्य में काफी उतार चढ़ाव आने वाले थे। 


भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका 

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के बाद  अंग्रेजो द्वारा कई नीतियाँ बनाई गयी जो भारतीय लोगो के विरुद्ध थी, तथा इस दौर में कोंग्रेस के नेता अलग अलग तरीको से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को आगे बढ़ाना चाहते थे, और बंगाल विभाजन के बाद जब देश में एक क्रांतिकारी लहर दौड़ने  लगी, तो यह भी दो अलग-अलग सोच में विभाजित हो गयी, और 1907 में दो दलों का निर्माण हुआ गरम दल और नरम दल। गरम दल के नेताओ में मुख्य बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय  तथा विपिन चंद्र पाल (लाल, बाल ,पाल) थे।  वही नरम दल के नेताओ में दादा भाई नैरोजी, मोती लाल नेहरू तथा गोपाल कृष्ण गोखले थे।  नरम दल के नेता अंग्रेजो के साथ मिलकर काम करना चाहते थे, ये बड़े ही सुलझे तरीके से काम करना चाहते थे। वही दूसरी और गरम दल के नेताओ का मानना था कि अंग्रजो के साथ संयोजक सरकार बनाना अपने लोगो को धोखा देना है, इन्होने आंदोलनों का सहयोग लेना उचित समझा। गरम दल पूर्ण स्वराज की मांग कर रहा था वो एक स्वतंत्र देश चाहते थे, और नरम दल अंग्रेजो के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहते थे। 

1915 में महात्मा गाँधी साउथ अफ्रीका से भारत लौटे और एक बड़ा बदलाव कांग्रेस में देखने को मिला। प्रथम युद्ध के समय 1916 में कांग्रेस पुनः एक हो गए। सन 1919 में जलियावाला बाग हत्याकाण्ड के बाद महात्मा गाँधी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव बने। उनके नेतृत्व में कांग्रेस एक कुलीन वर्ग संस्था से परिवर्तित होकर आम जन मानस की पार्टी बन गयी। कांग्रेस में कमेटियों का निर्माण हुआ और उनके लिए चुनाव होने लगा। 1920 में उन्होंने खिलाफत आंदोलन छेड़ दिया और सत्याग्रह को आंदोलनो का एक जरिया बना दिया। 1922 में हुए चौरी चौरा कांड के बाद उन्होंने असहयोग आंदोलन को वापस ले लिया। जिससे कांग्रेस टूट गयी। 1929 के कांग्रेस के लाहौर के अधिवेशन में जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता  में पूर्ण स्वराज्य को इसका मकसद बनाया गया।  भारत सरकार अधिनियम 1935 के बाद सन 1936-1937 में हुए 11 प्रांतो के चुनाओ में कांग्रेस पूर्ण बहुमत से जीती।

Jawahar Lal Nehru
जवाहर लाल नेहरू 


आजादी के पश्चात  भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस-

आजादी के पश्चात भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मुख्य राजनैतिक पार्टी के रूप में उभरी, तथा अभी भी कांग्रेस दो प्रभावशाली राजनैतिक पार्टी में से एक है। इस पार्टी ने कई राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री देश को दिए है, देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू इस पार्टी से थे। यह कई सालो तक सत्ता में रही, जिसको बाद में जनता पार्टी  द्वारा चुनौती दी गयी। जनता पार्टी को वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के नाम से जाना जाता है।  

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री -

भारत के इतिहास में देखा जाए तो सबसे ज्यादा कार्यकाल कांग्रेस पार्टी का रहा है। कांग्रेस पार्टी से जीत कर प्रधानमंती बने नेता-
  • जवाहर लाल नेहरू (15 अगस्त 1947-27 मई 1964 )
  • गुलजारी लाल नंदा (27 मई 1964-19 जून 1964) (11 जनवरी  1966- 24 जनवरी1966)
  • लाल बहादुर शास्त्री (19 जून 1964-11 जनवरी 1966)
  • इंद्रा गाँधी (24 जनवरी 1966-24 मार्च 1977) (14 जनवरी 1980-31 अक्टूबर 1984)
  • राजीव गाँधी (31 अक्टूबर 1984-02 दिसंबर 1989)
  • पी वी नरसिम्हा राव (21 जून 1991-16 मई 1996 )
  • डॉ मनमोहन सिंह (22 मई 2004-26 मई 2014)
और पड़े : बंग-भंग(बंगाल विभाजन 1905) 
                1857 की क्रांति 

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