टूर ऑफ ड्यूटी

टूर ऑफ ड्यूटी

क्या है टूर ऑफ़ ड्यूटी?

 विश्व के अनेको देश हैं  जहाँ सेना में अनिवार्य  सेवा का प्रावधान है, देश के हर नागरिक को एक ना एक बार सेना में शामिल होना होगा। जैसे कि इजराइल में हर नागरिक को 18 वर्ष की आयु के पश्चात  2 साल तथा 8 महीने के लिए सेना में आवश्यक रूप से शामिल होना होता है, इसे ही टूर ऑफ़ ड्यूटी के नाम से जाना जाता है।माना  जाता है कि इससे देशभक्ति की भावना बढ़ती है तथा अनुशासन में भी इजाफा होता है क्योकि आर्मी अपने कट्टर अनुशासन के लिए जानी जाती है। भारत में भी इसका प्रस्ताव रखा गया है, परन्तु भारत में यह पूर्ण रूप से स्वैछिक  होगी, सिर्फ वो ही सेना में शामिल होंगे जो या तो सेना में जाने को तत्पर होंगे तथा भर्ती होने की सभी शर्तो पर खरे उतरेंगे।  इसमें जवान तथा अधिकारी दोनों सम्मिलित होंगे। इसकी सीमाएं तथा नीतियाँ अभी अनुमोदित नहीं हुयी हैं और ना ही केंद्र सरकार की ओर से इसमें कुछ टिपण्णी की है। प्रस्तावानुसार डेमो के तौर पर पहले 100  अधिकारी तथा 1000  सैनिको को भर्ती किया जायेगा। 

क्या आवश्यकता है टूर ऑफ़ ड्यूटी की?

कोरोना संकट में सरकार अपने बजट का अधिकांश भाग इस संकट से उबरने के लिए खर्च कर रही या लगाने वाली है।  भारत अपने जीडीपी का 2.4 % सेना में खर्च करती है। भारत के पास विश्व की सबसे बड़ी स्थायी सेना है तथा सेना में पेंसन भी दी जाती है जिस कारण केंद्र सरकार को बहुत ज्यादा बजट का भाग पेंशन के तौर पर देना पड़ता है तथा सेना को रक्षा मंत्रालय के कुल बजट का 28.4% सैलेरी के रूप में देना पड़ता है।  टूर ऑफ़ ड्यूटी के प्रस्ताव के मुताबिक  एक एसएससी अधिकारी में 10-14 साल की सेवा के लिए 5 -6.8 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ते है, तथा टूर ऑफ़ ड्यूटी के पश्चात एक अधिकारी पर सिर्फ 80-85 लाख रूपये खर्च करने पड़ेंगे। वही दूसरी ओर एक जवान पर उसके सैलरी तथा पेंशन पर इससे 11 करोड़ रूपये बचाये जा सकते है। जिससे कि  रक्षा बजट का बहुत बड़ा भाग इसके आधुनिकीकरण पर लगाया जा सकता है। 

इसको   बेरोजगारी, राष्ट्रवाद तथा देशभक्ति से भी जोड़ कर देखा जा रहा है, इससे रोजगार बढ़ेंगे तथा स्किल मैनपावर बढ़ेगी।  कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी अनुशासित लोगो की संख्या बढ़ेगी। तथा भारतीय सेना को भी युवा जवान व अधिकारी मिलेंगे, सेना में सेवा देने के पश्चात जिनमे देशभक्ति तथा राष्ट्रवाद की भावना बढ़ेगी। 


कितनी सही व कितनी गलत? 

जहां एक ओर इसकी तारीफ हो रही है वही दूसरी ओर यह भी माना जा रहा है कि आर्मी में युवा के साथ साथ अनुभवी लोगो की आवश्यकता होती है जो कि 3 साल की अल्प अवधि में प्राप्त करना मुश्किल है। तथा आज़ादी के बाद की उस रणनीति की भी चर्चा की जा रही है, जिसमे कहा  गया था कि भारत को आर्मी की आवश्यकता नहीं है, हमारी पुलिस आंतरिक तथा वाह्य खतरों से लड़ने को तैयार है।  और सभी जानते है कि वो कितना असफल रहा। 
E-gyankosh

0 Response to "टूर ऑफ ड्यूटी"

टिप्पणी पोस्ट करें

if you have any doubt or suggestions please let me know.

Advertise in articles 1

advertising articles 2