घरेलू हिंसा - Domestic Violence

घरेलू हिंसा - Domestic Violence

घरेलू हिंसा-

घरेलू  हिंसा के अंतर्गत सिर्फ शारीरिक हिंसा ही नहीं आती, किसी भी व्यक्ति या पारिवारिक सदस्य द्वारा लगातार किया गया अपमानजनक व्यवहार जो मानसिक या शारीरिक क्षति पहुंचाता हो घरेलु हिंसा का अंग है। जिसका उद्देश्य विभिन्न प्रकार से किसी पर अपने अधिकार को जमाये रखना व उस पर मनमानी करना है। घरेलू हिंसा के ज्यादातर मामले महिलाओ (पत्नी, बेटी, बहु आदि) के साथ होते है। जिसके लिए हमारा समाज दोष, दोषी के बजाय जिसके साथ हुआ है उसपे डाल देता है। यह ना तो जन्मजात है और ना  ही शराब, मानसिक बीमारी और ना ही मजबूरी यह है तो मात्र अपनी शक्ति का किसी कमजोर पर प्रदर्शन जो समाज द्वारा सिखाया जाता है, जहां आज भी स्त्री को सिर्फ घर में काम करने वाली एक नौकरानी की तरह माना जाता है।

घरेलू हिंसा के प्रकार -

अक्सर लोगो द्वारा  घरेलू हिंसा को सिर्फ शारीरिक क्षति पहुँचाना माना जाता है, परन्तु यह उससे कई ज्यादा है और जिसके परिणाम अति भयावहकारी है, जिसके परिणामस्वरूप पीड़ितों को अदृश्य चोटें आती हैं, तथा जिसमे पीड़ित अपनी जान तक गवां सकता है। अपमानजनक व्यवहार करने वाली कई इकाइयां हैं, जिनमें से प्रत्येक की अपनी विनाशकारी शक्ति  है।

दुर्व्यवहार के प्रकार


  • नियंत्रण
  • शारीरिक शोषण
  • यौन शोषण
  • भावनात्मक शोषण
  • धमकी
  • एकांत
  • मौखिक दुरुपयोग (ज़बरदस्ती, धमकी और दोषारोपण)
  • पुरुष विशेषाधिकार का उपयोग करना
  • आर्थिक शोषण


हिंसा के कारण -

अत्यधिक पारंपरिक मान्यताओं वाले कुछ लोग सोचते हैं कि, उनके पास अपने साथी को नियंत्रित करने का अधिकार है और महिलाएं पुरुषों की बराबरी नहीं कर सकती। माना जा सकता है कि कुछ व्यक्तियों में मानसिक समस्या हो लेकिन अधिकांश लोग घर में होने वाली इन हिंसाओं से सीखते है, जहां घरेलू हिंसा को उनके परिवार में उठाए जाने के एक सामान्य हिस्से के रूप में स्वीकार किया गया था।  इन संभावित कारणों को कुछ बेहतर तरीके से समझा जा सकता है, जैसे कि एक प्रताड़ित करने वाले का यह मानना है, कि वह अपने साथी को शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक रूप से प्रताड़ित कर सकता है। कई जगह हिंसा का कारण पत्नी अथवा बहु के मायके से ना मिलने वाली आर्थिक सहायता अर्थात दहेज़ है।

घरेलू हिंसा की दर-

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा संकलित रिपोर्ट "भारत में अपराध 2018" रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में हिंसा के मामलो में सर्वाधिक मामले  घरेलू हिंसा के खिलाफ है। आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित कुल 89,097 मामले 2018 में पूरे भारत में दर्ज किए गए थे, 2017 में इसके तहत दर्ज 86,000 मामलों के आंकड़ों के अनुसार यह आंकड़े और ज्यादा बड़े है। महिलाओ की सुरक्षा के मामले में उत्तरप्रदेश सबसे कमजोर कड़ी है। महिलाओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज कुल अपराधों में से ज्यादातर मामले (31.9.9%) पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा संकाय के तहत थे, महिलाओं के अपहरण के मामले 22.5 प्रतिशत और बलात्कार के मामलों में 10.3% अपराध के आंकड़े शामिल थे।


कोरोना लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा के मामलो में वृद्धि हुई है। यह हाल में मुद्दे की गंभीरता और व्यापकता को भी दर्शाता है। यह माना गया है कि लॉकडाउन के पहले चरण में घरेलू हिंसा की संख्या में 53% की वृद्धि हुई है।

घरेलू हिंसा पर कानून-


  • विवाहित महिलाओं को उनके पति या उनके रिश्तेदारों के द्वारा हुए दुर्व्यवहार से बचाने के लिए कई कानून हैं। भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए  के तहत इसके न्याय का व्यापक दायरा है।
  • दहेज की संभावना को स्वयं दहेज निषेध अधिनियम 1961 के तहत गैरकानूनी घोषित किया गया है। इसके बावजूद यदि दहेज महिलाओं के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दिया गया हो और लिया गया हो, तो वह भी इस अधिनियम के तहत दोषी है।

*निम्नलिखित NGO महिलाओं को भारत में उनके अधिकारों के लिए लड़ने में मदद करते  है।
  • गुरिया इंडिया 
  • एक्शन ऐड इंडिया 
  • मजलिस मंच
  • प्रेरणा
E-gyankosh


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