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हांगकांग - Hong Kong

हांगकांग - Hong Kong

हांगकांग-

हांगकांग , चीन का एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र -Special Administrative Region(SAR) है, जिसका क्षेत्रफल 1,104 वर्ग किमी है, और जनसंख्या लगभग 80,00,000 है। यह मुख्यतया द्वीपों से मिलकर बना है। सन 1842 में हुए पहले आंग्ल-चीनी युद्ध के पश्चात् चिंग साम्राज्य ने इस हिस्से को ब्रिटेन को सौंप दिया। तथा 155 साल तक उपनिवेश बने रहने के पश्चात सन  1997 में हांगकांग  चीन को कुछ शर्तो पर वापस दे दिया। 

hong kong
हांग कांग 

हांगकांग तथा चीन 

हांगकांग  पर हुए 1984 के चीन तथा ब्रिटिश की संयुक्त घोषणा के पश्चात यह तय किया गया की हांगकांग  को चीन को दे दिया जायेगा तथा हांगकांग  को चीन की "एक देश, दो नीति" के तहत 50 साल के लिए अपनाया जाएगा, इसका मतलब यह हुआ कि विदेशी तथा रक्षा मामलो को छोड़ हांगकांग  50 वर्ष तक स्वायत्ता का आनंद ले सकेगा, अर्थात हांगकांग  की अपनी प्रशाशनिक प्रणाली हो सकती है, इसके तहत एक अलग संविधान हांगकांग  के लिए बनाया गया जिसे बेसिक लॉ भी कहा जाता है। चीन ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि यह  एक बंदरगाह है, जहाँ से व्यापार करना बहुत आसान हो जाएगा ,और सन  1950 में यह एक व्यस्त व्यापारिक बंदरगाह और विनिर्माण का केंद्र बन गया था, जिससे इसकी अर्थव्यवस्था में काफी उछाल आ गया था, और इसके द्वारा चीन अपनी अर्थव्यवस्था को और मजबूत करना चाहता था। परन्तु इस मामले में हांगकांग के लोगो की अवधारणा कुछ अलग थी, वो हांगकांग  को एक स्वतन्त्र देश बनाना चाहते थे, और दूसरी और चीन में लोकतंत्र की खस्ता हालत है, इसलिए वह चीन के साथ नहीं जुड़ना चाहते थे, चीन में मौलिक अधिकारों पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया जा चुका है। 

हांगकांग में आंदोलन 

 इन आंदोलनों की नीव सन  1997 में पड़ गयी थी, जब हांगकांग  को चीन को दे दिया तथा चीन को हांगकांग  के केवल रक्षा तथा विदेशी मामलो को देखने का अधिकार था,तथा 1984 के तहत चीन की यह जिम्मेदारी थी की वह  50 वर्ष  (2047) तक हांगकांग  में स्वतंत्रता तथा कानून को बरकार रखे। परन्तु वर्ष 2014 में हुए अम्ब्रेला मूवमेंट में प्रदर्शन कर रहे लोगो को चीन ने जेल में डाल दिया तथा स्वतंत्रता का समर्थन करने वाले एक राजनैतिक पार्टी को बंद करवा दिया, जिसने हांगकांग  की स्वंत्रता की नींव को हिला के रख दिया। 2014 से लगातार वहां पर आंदोलन किये जा रहे है। 

  • अम्ब्रेला मूवमेंट- यह एक राजनैतिक आंदोलन था जो हांगकांग  में होने वाले चुनाओ की पारदर्शिता को लेकर था।  यह आंदोलन 79 दिनों तक  चला था, तथा इसमें हांगकांग  पुलिस द्वारा टेअर गैस का बहुत बड़ी मात्रा में प्रयोग किया, और इससे बचने के लिए बहुत बड़ी जनसंख्या छाता (Umbrella) लेकर आंदोलनों में उतर गयी, तथा इसी कारण इसे अम्ब्रेला मूवमेंट के नाम से जाना जाने लगा। यह पहला ऐसा आंदोलन था जिसको कॉलेज के विद्यार्थियों ने गति प्रदान की थी। चीन ने इस आंदोलन के लिए एक बयान जारी किया था, जिसमे कहा गया कि इस आंदोलन को बड़ाने के लिए पश्चिम के कुछ देशों द्वारा फंडिंग की जा रही है।

  • प्रत्यर्पण विधेयक- वर्ष 2019 में प्रत्यर्पण विधेयक के कारण भी यहाँ आंदोलन देखने को मिला, इस विधेयक के अनुसार कोई भी व्यक्ति अगर अपराध करके हांगकांग  में शरण लेता है तो उसको चीन में भेजा जाएगा इसके तहत लोगो को उन देशो में भी भेजा जा सकता है जिसके साथ हांगकांग  की कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है। और इस विधेयक के लागू होने पर हांगकांग  के लोगो पर चीनी कानून थोप दिया जायेगा। 

  • राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनहांगकांग  में हो रहे हिंसात्मक आंदोलनों को दबाने के लिए चीनी सरकार ने नेशनल सिक्योरिटी लॉ को अपने संसद में पेश किया।  इसके पास होने के पश्चात किसी भी आंदोलनकारी को गिरफ्तार किया जा सकता है, चीन इस कानून को आर्टिकल 18 के अनुबंध III में लाना चाह रहा है जिसमे चीन का अधिकार है, इस आर्टिकल में पहले से विदेश तथा रक्षा कानून को डाला गया है। विश्व के अनेको देशो द्वारा इस कानून की अवहेलना की जा रही है। ह्यूमन राइट वॉच ने इसकी अवहेलना की तथा कहा कि  यह कानून हांगकांग  की स्वतंत्रता को समाप्त करने के लिए बनाया जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने भी इसके लिए अपने बयान में कहा कि अगर यह लागू किया जाएगा तो हम चीन पे प्रतिबंध लगाएंगे। 
इनके अलावा भी बहुत से आंदोलन हांगकांग में हुए, चीन हांगकांग  को अपना हिस्सा बनाना चाह रहा है, उसे डर है कि  2047 के बाद कही हांगकांग स्वतंत्र ना हो जाये। और उसको खोने के बाद चीन की अर्थव्यवस्था में हानि देखने को मिलेगी। 

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