जापान में आर्थिक मंदी

जापान में आर्थिक मंदी

जापान में आर्थिक मंदी (Japan mein aarthik mandi)

जापान ने आर्थिक दृष्टि से विश्व में एक अलग पहचान बनाई है, बार बार प्रकृति की मार झेलने के बाद भी जापान ने अपना अस्थित्व नहीं खोया वह हर बार उठा है फिर आगे बडा है यही उसकी खास बात है जो उसको विश्व भर में एक छोटा सा देश होने के बाद भी विश्व के महानतम देसो में शामिल करवाती है।


Japan
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 महामारी का प्रभाव

कोरोना के चलते पूरी दुनिया विभिन्न कठिनाईयों से  गुजर रही है। लोग कहीं कोरोना से दम तोड़ रहे हैं, तो कही कोरोना के कारण आयी भुखमरी से।  पूरी दुनिया में अबतक कोरोना से 3 लाख  23 हज़ार लोग मर चुके है, लेकिन इसके कारण  आयी भुखमरी से मरने वालो की संख्या का कोई पता नहीं।  कोरोना ने विश्व के हर एक देश में आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न कर दी है।  जापान, जर्मनी के बाद दूसरा  देश बन चुका है जहाँ आर्थिक मंदी आ गयी है। और विश्व के अन्य देश भी इस ओर अग्रसर है। 

परिस्थितियाँ 

जापान विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसकी जीडीपी वृद्धि दर पिछले क़्वार्टर से लगातार गिर रही है , जोकि इस क़्वार्टर  में 0.9% तक गिरी जोकि विश्लेषणों के अनुसार (1.2%) से अच्छी है, यह  जापान में स्टेट इमरजेंसी (जापान के 39 प्रांतों में इमरजेंसी लागू की गयी है )  के बाद हुआ। जापान में लॉकडाउन  की अभी तक घोषणा नहीं की, वहा सिर्फ स्टेट इमरजेंसी लगाई गयी है , जापान  की  वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर में कुल 3.4% की  गिरावट आ चुकी है, इसकी शुरुवात अक्टूबर में विक्री कर में वृद्धि (8% से 10%) से हुई। 
निजी खपत जोकि  जापान की अर्थव्यवस्था में  आधे से अधिक का योगदान देती है में 0.7% की गिरावट इमरजेंसी से पहले ही देखने को मिल चुकी थी, निर्यात जोकि जापान की अर्थव्यवस्था में 16% का योगदान देते हैं, में भी 6% गिरावट देखने को मिली।अर्थशास्त्रियो के अनुसार अप्रैल से जून के अवधि में अर्थव्यवस्था में 22% की गिरावट देखने को मिल सकती है जोकि गिरावट में सबसे बड़ा रिकॉर्ड हो  सकता है। जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो अबे ने 1 खरब  के राहत पैकेज की घोषणा की थी जिसमे से 10वां भाग  लघु उद्योग तथा ऐसे परिवारों के लिए था जो कोरोना महामारी के कारण रोजगार गवा चुके हैं तथा इसका अधिकांश भाग 0% ब्याज पर लोन देने के लिए था। जिससे कि अर्थवयवस्था में सुधार हो सके। कोरोना के कारण विश्व के अधिकांश देशो में आयात, निर्यात में कठिनाई हो रही है। अधिकांश देशो ने लॉकडाउन नीति को अपनाया है जिस कारण शैलानियों की संख्या भी शून्य हो चुकी है। जिससे अर्थव्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है।

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