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राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम( कानून)- National Security Act

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम( कानून)- National Security Act

 राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (कानून )

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के नाम से भी जाना जाता है, 23 सितम्बर 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के कार्यकाल में पारित किया गया।  जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्र की सुरक्षा के लिए ऐसे कानून का निर्माण करना था, जिसमे कुछ विशेष शक्तियाँ राज्य सरकार व केंद्र सरकार के पास हो, जिसको सिर्फ देश की सुरक्षा के लिए प्रयोग में लाया जाये। इसे अंग्रेजी में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के नाम से जाना जाता है। इस अधिनियम के कुल 18 अनुभाग है। 

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अधिकार व सीमाएं-

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को अंग्रेजो द्वारा बनाये गए कुछ अधिनियमों से लिया गया है, जिसमे वह अपनी सत्ता को बचाने के लिए किसी को भी, कही भी, बिना किसी सबूतों के गिरफ्तार कर सकते थे, परन्तु इसमें अनेको सुधार व तब्दीली कर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की रचना की गयी।  जिसमे नागरिको के अधिकारों की भी सुरक्षा को मद्देनजर रखा गया। यह राज्य व केंद्र सरकार को किसी भी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार देती है जो-
  •  देश की आतंरिक सुरक्षा को भंग करने की कोशिश कर रहा हो। 
  • देश की कानून व्यवस्था में बाधा खड़ी कर रहा हो। 
  • आवश्यक सेवा की आपूर्ति में बाधा खड़ी कर रहा हो।* 
  • इसके अंतर्गत किसी ऐसे विदेशी व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया जा सकता है, जो गैरकानूनी तरीके से देश में रह रहा हो, या देश की सम्प्रभुता को क्षति पहुंचने की कोशिश कर रहा हो। 

गिरफ़्तारी की अवधि -

इसके तहत जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त व राज्य सरकार अपनी सीमाओं के अनुसार गिरफ्तारी कर सकते है।
  • इसके तहत जिलाधिकारी व पुलिस आयुक्त किसी भी व्यक्ति को अधिकतम 15 दिनों के लिए गिरफ्तार कर सकते है, और इसी दौरान राज्य सरकार की सहमति के आधार पर रिपोर्ट को एक सप्ताह के अंदर केंद्र सरकार को भेजना पड़ता है। 
  • राज्य सरकार की असहमति पर उसे 12 दिनों से अधिक कारावास में नहीं रखा जा सकता। 
  • किसी भी व्यक्ति को सिर्फ 3 महीने के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है, जिसको आवश्यकता अनुसार 3-3 महीने की अवधि के लिए बढ़ाया जा सकता है। 
  • दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के तहत उस व्यक्ति को कही से भी गिरफ्तार किया जा सकता, जिसके खिलाफ आदेश जारी किया गया हो। 
  • गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को किसी राज्य में भेजने से पहले, उस राज्य सरकार को इसकी आधिकारिक जानकारी देना आवश्यक होता है। 

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की आलोचना-

बहुत से परिपेक्ष्यों के  आधार पर इसकी आलोचना भी होती है। 
  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा इसमें हुई गिरफ्तारी का ब्यौरा नहीं दिया जाता, जिससे इस कानून के अंतर्गत हुई गिरफ्तारियों की संख्या का पता नहीं लगाया जा सकता। 
  • कई बार अधिकारी सिर्फ द्वेष साधने के लिए भी गिरफ्तारी कर देते है। 
  • इसमें न्यायपालिका का शीघ्र हस्तक्षेप नहीं होता इसलिए भी इसकी आलोचना होते रहती है। 
* हाल में ही कोरोना के बचाव के चलते सुरक्षा कर्मियों तथा स्वास्थ्य कर्मियों पर हुई पत्थर बाजी के लिए उत्तरप्रदेश की योगी सरकार द्वारा इसका इस्तेमाल किया गया।  
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