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गाँधी इरविन समझौता (दिल्ली पैक्ट)

गाँधी इरविन समझौता (दिल्ली पैक्ट)

गाँधी इरविन समझौता (दिल्ली पैक्ट)-

भारत में बड़ रहे जनाक्रोश और जनांदोलन को कम करने के उद्देश्य से लॉर्ड इरविन ने गांधी जी को रिहा कर 05 मार्च 1931 को एक समझौता किया जिसे गांधी इरविन समझौता कहा जाता है, इसे दिल्ली पैक्ट के नाम से भी जाना जाता है। यह पहली बार था जब ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों के साथ समानता के स्तर पर समझौता किया था, इसलिए इसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक अहम कड़ी माना जाता है।


gandhi ji
महात्मा गाँधी

गाँधी इरविन समझौते का मुख्य कारण -

सन् 1930 में गांधी जी ने नमक यात्रा की और 06 अप्रैल 1930 की शुबह एक मुट्ठी नमक हाथ में लेकर नमक कानून तोड़ा जो कि 1882 से चला आ रहा था और देश भर में नमक सत्याग्रह की शुरवात हो गयी। अप्रैल में कांग्रेस के अध्यक्ष श्री जवाहर लाल नेहरू को गिरफ्तार कर लिया गया और दरसना नमक सत्याग्रह से एक दिन पहले महात्मा गांधी जी को भी गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे देश में आक्रोश की लहर दौड़ पड़ी बहुत से लोग नमक सत्याग्रह में कूद पड़े और देश भर में रैलियां निकाली जाने लगी लोग ब्रिटिश कानून और अधिनियमों को तोड़ने लगे और इसी के चलते देश में कुल 60,000 से भी ज्यादा गिरफ्तारियां हुयी। इस प्रकार प्रारंभ हुए सविनय अवज्ञा आन्दोलन के पश्चात ब्रिटिश सरकार को यकीन हो गया था कि अगर समय पर इसका कोई समाधान ना निकाला गया तो उनका राज ज्यादा दिन नहीं चल पाएगा और उन्हें भारत को भी राजनैतिक हिस्सेदारी देनी पड़ेगी। इसके समाधान के लिए नवंबर 1930 में गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया और इसमें 57 राजनेताओं और ब्रिटिश शासन के अधीन 16 रियासतों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिसमें डॉ भीम राव अम्बेडकर और मोहम्मद अली जिन्ना भी शामिल हुए थे। 
परन्तु जनवरी 1931 में इस सम्मेलन का कोई उचित निष्कर्ष नहीं निकल पाया और यह अनिश्चित काल तक रद्द कर दी गई। अंग्रेजो को अहसास हो गया कि बिना कांग्रेस के समर्थन के गोलमेज सम्मेलन का कोई निष्कर्ष नहीं निकल सकता और महात्मा गांधी का कांग्रेस में बहुत योगदान और विश्व भर में उनकी राजनैतिक छवि के कारण उनको जनवरी 1931 में जेल से रिहा कर दिया गया और गांधी जी और तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच एक समझौता हुआ जिसे गांधी इरविन समझौता (दिल्ली पेक्ट) के नाम से जाना जाता है।

गाँधी इरविन समझौता के मुख्य बिंदु-

तत्कालीन ज्वलंत मुद्दों को मद्देनजर रखते हुए गांधी जी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच इस समझोते में कुल 8 मीटिंग हुई जो कि कुल 24 घंटे से ज्यादा चली और इसके इतने लंबे चलने से कांग्रेस और महात्मा गांधी जी को लगा कि ब्रिटिश सरकार इसे गंभीरतापूर्वक ले रही है और जितनी भी शर्तों पर बात हुई है वो पूरी की जाएंगी। गांधी जी और लॉर्ड इरविन के बीच हुए समझौते (गांधी इरविन समझौता) के मुख्य बिंदु निम्न प्रकार थे।

लॉर्ड इरविन ने निम्नलिखित शर्तों को स्वीकार किया -

  • हिंसा के आरोपियों को छोड़ कर बाकी सभी राजनैतिक बंदियों को रिहा कर दिया जाएगा।
  • नमक कानून को पूर्ण रूप से समाप्त कर, भारतीयों को समुद्र किनारे नमक बनाने का पूर्ण अधिकार दिया जाएगा।
  • भारतीय विदेशी कपड़ा मिल और शराब की दुकानों के आगे धरना दे सकते है।
  • आन्दोलन के दौरान त्यागपत्र देने वालो को उनके पदो पर पुनः बहाल किया जाएगा।
  • आंदोलनकारियों की आन्दोलन के समय जब्त संपत्ति को वापस किया जाएगा। 

 गांधी जी ने निम्नलिखित शर्तों को स्वीकार किया -

  • सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित कर दिया जाएगा।
  • कांग्रेस द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेगी।
  • कांग्रेस द्वारा अंग्रेजी सामानों का बहिष्कार नहीं किया जाएगा ।
  • गांधीजी पुलिस द्वारा कि गई ज्यादतियों की जांच की मांग छोड़ देंगे।

गाँधी इरविन समझौते के परिणाम-

गांधी इरविन समझौते में कई शर्तों का उल्लेख हुआ और कांग्रेस द्वारा सभी शर्तों को मान लिया गया। सविनय अवज्ञा आन्दोलन, जो कि अपने चरम में था पूरे देश में आजादी की मांग की लहर थी, सविनय अवज्ञा आन्दोलन के समाप्त करने से उसमे कमी आयी। कई नेताओं द्वारा इसको बन्द ना करने की बात भी कही थी परन्तु गांधी जी ने समझौते के चलते इसे बंद कर दिया। जिसको बाद में गांधी जी द्वारा अपनी बहुत बड़ी भूल माना गया। कांग्रेस ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया। परन्तु वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश सरकार अपनी शर्तो से मुकरती रही, नमक कानून के रद्द होने के पश्चात भी नमक बनाने वालों पर पुलिस द्वारा गोलीबारी की गयी, सभी आंदोलनकारियों को रिहा नहीं किया गया, भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी हो गयी, पूरे भारत देश में असंतोष की लहर थी। लॉर्ड विलिंग्डन 1931 में भारत आए और उन्होंने कांग्रेस को गैरकानूनी संगठन घोषित कर दिया, जिस कारण गांधी इरविन समझौते की सभी शर्तो को नकारात्मक परिणाम मिला। देखा जाए तो गांधी इरविन समझौते का पूर्ण परिणाम/फायदा ब्रिटिश सरकार को मिला कांग्रेस को ब्रिटिश सरकार की धोखेबाजी का सामना करना पड़ा।

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