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जापान-अमेरिका सुरक्षा समझौता- 1951

जापान-अमेरिका सुरक्षा समझौता- 1951

08 सितंबर 1951 को सेनफ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया में जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच एक संधि पर हस्ताक्षर किए गए जिसमें 5 अनुच्छेदों का उल्लेख किया गया और इसके द्वारा अमेरिका को अपनी सैन्य शक्ति को सुदूर पूर्व में स्थापित करने का अधिकार दिया गया और इस संधि को जापान-अमेरिका सुरक्षा संधि के नाम से जाना जाता है।

जापान-अमेरिका सुरक्षा संधि
जापान-अमेरिका सुरक्षा समझौता 


शांति समझौता-

द्वितीय विश्व युद्ध में जापान पर परमाणु बम गिरने के पश्चात जापान यह युद्ध हार चुका था। और सन् सितंबर 1951 में जापान और मित्र राष्ट्रों के बीच  शांति समझौता हुआ। इस समझौते के कारण जापान के निशस्त्र होने के कारण जापान के पास आत्म रक्षा का कोई भी साधन उपलब्ध नहीं था। और ऐसी परिस्थितियों में जापान पर बाह्य हमला होना तय था इसलिए जापान ने इसी दिन अमेरिका के साथ एक समझौता (जापान-अमेरिका सुरक्षा संधि) किया।

मित्र राष्ट्रों के साथ हुए शांति समझौते के बाद जापान को एक प्रभुत्व संपन्न देश का दर्जा मिला और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुसार हर देश को आत्म सुरक्षा का अधिकार होना चाहिए। चूंकि जापान निशस्त्र हो चुका था इसलिए उसने अमेरिका से मदद ली तथा उसके सैन्य टुकड़ी को जापान में प्रवेश करने दिया जिससे अंतरराष्ट्रीय शांति और जापान की सुरक्षा कायम हो सके। इसलिए अमेरिका के प्रतिनिधियों और जापान के प्रतिनिधियों द्वारा 5 अनुच्छेदों के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

जापान-अमेरिका सुरक्षा समझौता -

इस सुरक्षा समझौते में जिन 5 अनुच्छेदों के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए वो निम्न लिखित है । 

अनुच्छेद 1 -

अनुच्छेद 1 के अनुसार जापान अमेरिका को यह अधिकार प्रदान करता है कि अमेरिका कि जल थल तथा वायु सेनाएं जापान में तथा जापान के लिए अपने सैन्य ठिकाने कायम करे जिससे अंतरराष्ट्रीय शांति तथा जापान की वाह्य हमलों से सुरक्षा कायम की जा सके।

अनुच्छेद 2-

अनुच्छेद 2 के अनुसार जापान बिना संयुक्त राज्य अमेरिका की सहमति के कोई भी शक्ति (जैसे कि किसी राष्ट्र की सेनाओं को जापान में आने की अनुमति) किसी अन्य राष्ट्र  को प्रदान नहीं करेगा।
 

अनुच्छेद 3-

अनुच्छेद 3 के अनुसार अमेरिकी सेना को बिना दोनों देशों के प्रशासनिक समझौतों के जापान से हटाया नहीं जाएगा।

अनुच्छेद 4-

अनुच्छेद 4 के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के द्वारा जापान में शांति व सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के पश्चात यह संधि समाप्त की जा सकती है।

अनुच्छेद 5-

अनुच्छेद 5 के अनुसार इस समझौते की पुष्टि जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा कि जाएगी और यह वाशिंगटन में अनुसमर्थन के साधन का दोनों देशों द्वारा आदन प्रदान करने के पश्चात अस्थित्व में आएगा।

20 मार्च 1952 में अमेरिकी सीनेट में इस समझौते कि पुष्टि की गई, 15 अप्रैल 1952 में समझौते को अमेरिकी कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित किया गया तथा 28 अप्रैल 1952 में यह संधि प्रभाव में आयी। जनवरी 1960 में वाशिंगटन में इस समझौते में कुछ सुधार किए गए जिसको संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान के बीच पारस्परिक सहयोग और सुरक्षा की संधि के नाम से जाना जाता है जिसके तहत अगर दोनों में से किसी भी देश पर हमला होता है तो यह माना जाएगा कि दोनों देशों पर हमला हुआ है। सन् 2012 में सेनकाकू द्वीप में हुए विवाद में अमेरिका की ओर से बयान जारी किया गया था कि सेनकाकू द्वीप भी जापान-अमेरिका सुरक्षा संधि के अंदर आता है और 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी इस संधि को इंगित कर कहा था अगर सेनकाकू द्वीप पर कोई भी हमला होता है तो अमेरिकी सेना उस द्वीप की रक्षा के लिए वहां जाएगी।

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