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 मगध साम्राज्य (The Magadha Empire)

मगध साम्राज्य (The Magadha Empire)

 मगध साम्राज्य

महाजनपद-
छठी शताब्दी ई.पू. बुद्ध के काल के दौरान, हमें 16 बड़े राज्यों का पता चलता है जिन्हें  महाजनपद कहा जाता है, जिनका उल्लेख बौद्ध पाठ अंगकोट्टार निकाय में किया गया है, ये महाजनपद या तो राजतंत्रात्मक थे या वर्ण में गणतंत्रात्मक थे। जिनमें मगध सबसे प्रमुख तथा शक्तिशाली था। 

6 वीं से 4 वीं शताब्दी ई.पू. की अवधि में चार महाजनपदों- मगध, कोसल, वत्स और अवंती के बीच वर्चस्व के लिए संघर्ष देखा गया। मगध के संस्थापक जरासंध और बृहद्रथ थे। लेकिन विकास हर्यक के काल में शुरू हुआ। मगध ने पूर्व जिलों पटना, गया और शाहाबाद के कुछ हिस्सों को अपनाया और इस समय का अग्रणी राज्य बन गया

हर्यक वंश (542-414 ई. पू)-

  • मूल रूप से 546 ईसा पूर्व में बिम्बिसार के दादा द्वारा स्थापित किया गया था, लेकिन वास्तव में बिंबिसार द्वारा स्थापित किया गया था। इनकी  राजधानी गिरिवराज(राजगृह) थी। 
  • उसने अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कौशल, वैशाली एवं मदरा राजवंशों से वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किये। 
  • उसकी राजधानी 5 पहाड़ियों से घिरी थी, जिसका प्रवेश द्वार चारों ओर से पत्थरों की दीवार से घिरा था।  इस वजह से राजगृह लगभग अजीवित (जिसपर विजय न पायी जा सके ) बन गया।   
  • बिम्बिसार के पुत्र अजातशत्रु (493-460 ई.पू.) ने उसकी हत्या कर सिंहासन प्राप्त किया। 
  • अजातशत्रु बौद्ध धर्म का अनुयायी था एवं उसकी राजधानी में प्रथम बौद्ध महासभा हुई। 
  • अजातशत्रु ने लिच्छिवि गणराज्य की राजधानी वैशाली को जीतकर मगध साम्राज्य का हिस्सा बना लिया था।
  •  उदायिन हर्यक वंश का अंतिम शासक था। 
  • उदायिन (460-444 ई.पू. ) ने भी अपने पिता अजातशत्रु की हत्या कर सिंहासन हासिल किया। 
  • पाटलिपुत्र (पटना) की स्थापना का श्रेय उदायिन को जाता है। 
  • उदायिन ने पाटलिपुत्र को अपनी राजधानी बनाया।
  • नागदशक हर्यक वंश का अंतिम शासक था। 

शिशुनाग वंश (414-344 ई.पू.)-

  • उदायिन के सेनापति  शिशुनाग ने मगध के सिंहासन पर अधिकार करके शिशुनाग वंश की स्थापना की।  
  • शिशुनाग वंश के शासन काल में राजधानी पाटलिपुत्र से बदलकर वैशाली ले जायी गयी। 
  • इस वंश के शासक कालाशोक के शासन में दूसरी बौद्ध महासभा का आयोजन राजधानी वैशाली में हुआ। 
  • इस वंश की प्रमुख उपलब्धि उज्जयिनी (मध्य प्रदेश) को जीतकर मगध साम्राज्य में मिलाना था। 
  • नंदिवर्धन इस वंश का अंतिम शासक था। 

नन्द वंश (344-323 ई.पू.)-

  • इस वंश का संस्थापक महापद्मनंद को माना जाता है। 
  • महापद्मनंद ने उड़ीसा में कलिंग को जीता तथा वहाँ नहरों का निर्माण कराया। 
  • बौद्ध परम्परा के अनुसार, महापद्मनंद ने लगभग 10 वर्ष तक शासन किया। उसके पश्चात उसके 8 पुत्रों  क्रमानुसार शासन किया। 
  • नन्द वंश का अंतिम शासक धनानंद  था। 
  • इसी के शासन काल में चाणक्य को अपमानित किया गया था। 
  • इसी के शासन काल में सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया। 

सिकंदर का आक्रमण-

  • सिकंदर मकदूनिया का शासक था।  उसने भारत पर 326 ई.पू. में आक्रमण किया। 
  • पंजाब के राजा पौरष  सिकंदर के साथ झेलम नदी के किनारे हाइडेस्पास का युद्ध लड़ा, इतिहासकार मानते हैं वो यह युद्ध हार गया। 
  • व्यास नदी पर पहुंचकर सिकंदर  के सिपाहियों ने आगे बढ़ने से इंकार कर दिया और उसे वापस लौटना पड़ा। 
  • सिकंदर के आक्रमण स्वरुप भारत और यूनान के प्रत्यक्ष संपर्क बने और चार भिन्न-भिन्न मार्गों और जलमार्गों के रास्ते खुले। 
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