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मौर्य वंश (The Mauryan Empire)

मौर्य वंश (The Mauryan Empire)

मौर्य वंश(322-184 ई.पू.)-




चन्द्रगुप्त मौर्य: (322-297 ई.पू.)

  •  चन्द्रगुप्त मौर्य चाणक्य की सहायता से अंतिम नंदवंशीय शासक धनानंद को पराजित कर 25 वर्ष  की आयु  में (322 ई.पू.)  मगध के सिंहासन पर आसीन हुआ और मौर्य साम्राज्य की स्थापना की। 
  • ब्राह्मण साहित्य चन्द्रगुप्त मौर्य को शूद्र कुलोत्पन्न बताते हैं, जबकि बौद्ध और जैन साहित्य उसे क्षत्रीय बताते हैं। विशाखदत्त कृत मुद्राराक्षस नाटक में उसके लिए वृषल (निम्न कुल) उपनाम का प्रयोग किया गया है। 
  • चन्द्रगुप्त मौर्य ने व्यापक विजय करके प्रथम अखिल भारतीय साम्राज्य की स्थापना की। 
  • चन्द्रगुप्त मौर्य ने तत्कालीन यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर को युद्ध में पराजित किया। संधि हो जाने पर सेल्यूकस ने चन्द्रगुप्त मौर्य से 5000 हाथी लेकर बदले में पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान, बलूचिस्तान और सिंधु नदी के पश्चिम का क्षेत्र उसे दे दिया था। 
  • इसके बाद सेल्यूकस निकेटर ने अपनी पुत्री का विवाह भी चन्द्रगुप्त मौर्य से कर दिया था। तथा उसने अपने राजदूत मैगस्थनीज़ को चन्द्रगुप्त के दरबार में भेजा। 
  • चन्द्रगुप्त  मौर्य ने भारत के विशाल हिस्से (काबुल, कांधार, गंगा-यमुना दोआब ,बिहार, आदि ) को अपने साम्राज्य में  मिला दिया।  तमिल ग्रन्थ अहनानूर और मुरनानूर से ज्ञात होता है कि दक्षिण भारत पर भी उसने आक्रमण किया था। 
  • वृद्धावस्था  चन्द्रगुप्त मौर्य ने जैन मुनि भद्रबाहु से जैन दीक्षा ली थी, और श्रवणवेलगोला में 297 ई.पू. में उपवास द्वारा अपना शरीर त्याग दिया। 


 बिन्दुसार:(297-273 ई.पू.)

  • बिन्दुसार चन्द्रगुप्त मौर्य का पुत्र था। 
  • चन्द्रगुप्त की मृत्यु के पश्चात  उसका पुत्र बिन्दुसार उसका उत्तराधिकारी बना। 
  • यूनानी लेखक बिन्दुसार को अभित्रोंचेट्स कहते थे, जबकि वायु पुराण में उसे मद्रसार ग्रंथों   में उसे सिहंसेन कहा गया है।  
  •  बिन्दुसार ने सुदूरवर्ती दक्षिण भारतीय क्षेत्रों को भी जीत कर मगध साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया था। 
  • बिन्दुसार के  शासनकाल में तक्षशिला में दो विद्रोह हुए, जिसका दमन करने के लिए पहली बार अशोक को तथा दूसरी बार सुसीम को भेजा। 
  • बिन्दुसार के राजदरबार में यूनानी शासक एण्टियोकस प्रथम ने डायामेस नामक व्यक्ति को राजदूत के रूप में नियुक्त किया। 
  • बिन्दुसार की मृत्यु 273 ई.पू. के लगभग हो गयी। 

अशोक:(269-232 ई.पू.)

  • अशोक बिन्दुसार का पुत्र था। 
  •  यद्यपि अशोक ने 273 ई.पू. में ही सिहांसन प्राप्त  कर  लिया था परन्तु 4 साल गृह युद्ध में रत रहने के कारण अशोक का वास्तविक राज्याभिषेक 269 ई.पू. में हुआ। 
  • राज्याभिषेक से पहले अशोक उज्जैन का राज्यपाल था।  
  • अशोक ने अपने राज्याभिषेक से सात वर्ष बाद कश्मीर और खोतान के अनेक क्षेत्रों को अपने साम्राज्य में मिलाया। 
  • अपने  राज्याभिषेक से आठवें  वर्ष अर्थात 261 ई.पू. में अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया और जीत लिए लिया। 
  • कलिंग युद्ध में हुए व्यापक नरसंहार ने  अशोक को विचलित  कर दिया जिसके परिणामस्वरुप उसने शस्त्र  त्याग की घोषणा कर दी। तत्पश्चात उसने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया। 
  •  अशोक  ने  शासनकाल के दसवें वर्ष में सर्वप्रथम बोधगया की यात्रा की थी। शासनकाल के बीसवें वर्ष लुम्बिनी ग्राम गया तथा उस गांव कर मुक्त कर दिया। 
  • अशोक ने अपने शासनकाल से पूर्व विहार यात्राओं  प्रचलन था, जिसमें  मनोरंजन के लिए पशुओं का शिकार किया जाता था।  अशोक ने इनके स्थान पर धम्म यात्रा  प्रावधान किया।   
  •  अशोक प्रथम शासक था जिसने अभिलेखों के मध्य से प्रजा को सम्बोधित किया, इसकी प्रेरणा उसने ईरानी शासक दारा प्रथम से ली थी। 
  • अशोक ने अभिलेखों में शहबाजगढ़ी एवं मानसेहरा (पकिस्तान) में अभीलेख खरोष्ठी लिपि में हैं। 
  • सर्वप्रथम 1837 ई. में जेम्स प्रिन्सेप ने अशोक के अभिलेखों को पढ़ने में सफलता हासिल की।  
मौर्य वंश का अंतिम शासक वृहद्रथ था। 

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