मुगल वंश (Mughal Empire)

मुगल वंश (Mughal Empire)

मुगल वंश 



दिल्ली सल्तनत के पतन के साथ ही भारत में मुगल वंश की शुरुवात हुई। मुगल वंश का प्रथम शासक बाबर तथा अंतिम शासक बहादुर शाह जफर II  था। मुगल वंश के महत्वपूर्ण शासकों के नाम निम्न लिखित हैं-
  1. बाबर (1526-1530ई.)
  2. हुमायूँ (1530-1540 ई. और 1555-1556 ई.)
  3. अकबर (1556-1605 ई.)
  4. जहाँगीर (1605-1627 ई.)
  5. शाहजहाँ (1627-1658 ई.)
  6. औरंगज़ेब (1658-1707 ई.)

बाबर (1526-1530ई.)

  • बाबर मुगल वंश का संस्थापक था।
  • बाबर मध्य एशिया स्थित फरगना का शासक था। 
  • बाबर के पिता उमर शेख मिर्जा तथा माता कुतलुगनिगार खानम थी। 
  • वह अपने पिता की तरफ से तैमूर (तुर्क) का तथा माता की तरफ से चंगेज खां (मंगोल) का वंशज था।
  • बाबर ने भारत पर पहला आक्रमण 1519 ई० में किया परन्तु उसका प्रथम महत्वपूर्ण आक्रमण 1526 ई० में हुआ।
  • बाबर द्वारा निम्न महत्वपूर्ण युद्ध लड़े गये-                                                                                              (1) पानीपत का प्रथम युद्ध (1526 ई०) -इसमें बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुगल वंश की स्थापना की। (2) खानवा का युद्ध (1527 ई०) -इसमें बाबर ने राणा सांगा को हराया। (3) चंदेरी का युद्ध (1528 ई०)-में बाबर ने मेदिनीराय को पराजित किया। (4) घाघरा का युद्ध (1529 ई०) -इसमें बाबर ने महमूद लोदी को पराजित किया।   
  • बाबर ने तुर्की भाषा में अपनी आत्मकथा 'तुजुक-ए-बाबरी' (बाबरनामा) लिखी। 
  • बाबर की मृत्यु 1530 ई० में आगरा में हुई।
  • अकबर ने बाबर का मकबरा आगरा से काबुल स्थानान्तरित करवाया।
  • बाबर के अलावा जहाँगीर तथा बहादुरशाह जफर ऐसे मुगल शासक थे जिनके मकबरे भारत से बाहर बनवाये गये। 
  • बाबर के सेनानायक मीरबाकी ने अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया। 
  • बाबर ने भारत में पहली बार बारूद तथा तोपखाने का प्रयोग किया।

हुमायूँ (1530-1540 ई. और 1555-1556 ई.)

  •  हुमायूँ ने अपना राज्य अपने तीन भाइयों (कामरान, असकरी, हिन्दाल) में बाँट दिया जो राजनीतिक दृष्टि से उसकी सबसे बड़ी भूल थी।
  •  हुमायूँ ने दिल्ली के निकट 'दीन पनाह' नगर की स्थापना की। 
  • उसका प्रमुख शत्रु शेरशाह सूरी था जिसने उसे चौसा के युद्ध (1539 ई०) में पराजित किया और 1540 ई० में कन्नौज (बिलग्राम) के युद्ध में पराजित करके भारत से बाहर चले जाने के लिए बाध्य कर दिया।
  • इस आधार पर हुमायूँ का शासन काल दो चरणों में विभक्त किया जा सकता है प्रथम-1530-1540 ई० द्वितीय-1555-1556 ई० 
  • अपने निर्वासन काल के दौरान हुमायूँ आरम्भ में अमरकोट के राणा वीरसाल के यहाँ तथा अन्ततः ईरान के शाह के यहाँ रहा। बाद में उसने ईरान के शाह की सहायता से, बैरम की मदद द्वारा 1555 ई. में पुनः सिंहासन प्राप्त किया। 
  • 1556 ई. में 'शेरमण्डल' नामक पुस्तकालय की सीढ़ियों से लुढ़ककर हुमायूँ की मृत्यु हो गयी। 
  • अकबर ने हुमायूँ का मकबरा दिल्ली में बनवाया (हुमायूँ के मकबरे में सर्वप्रथम संगमरमर का प्रयोग हुआ)। 
  • हुमायूँ की सौतेली बहन गुलबदन बेगम ने 'हुमायूँनामा' लिखी ।

अकबर (1556-1605 ई.)

    • अकबर का जन्म 1542 ई. में, हुमायूं के प्रवास काल के दौरान, अमरकोट में हुआ।
    • अकबर का राज्याभिषेक 1556 ई० में हुआ। 
    • 1560 ई.तक अकबर ने बैरम खां के संरक्षण में शासन किया। 
    • सिंहासन पर बैठते ही अकबर ने बैरम खां की सहायता से 1556 ई० में पानीपत के द्वितीय युद्ध में हेमू को पराजित किया। 
    • 1561 ई० में अकबर ने बैरम खां के संरक्षण से मुक्त होकर, अपने पहले सैन्य अभियान में मालवा के शासक बाज बहादुर को पराजित किया। 1564 ई में अकबर ने 'जजिया कर को समाप्त कर दिया।
    •  1575 ई. के 'हल्दीघाटी' के प्रसिद्ध युद्ध में अकबर के सेनापति राजा मानसिंह ने मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप को पराजित किया। 
    • 1575 ई० में अकबर ने आगरा से 36 किमी दूर फतेहपुर सीकरी नामक नगर की स्थापना की और उसमें प्रवेश के लिए बुलन्द दरवाजा बनवाया। 
    • इसी वर्ष अकबर ने फतेहपुर सीकरी में धार्मिक परिचर्चाओं हेतु 'इबादत खाने' की स्थापना की। 
    • 1582 ई० में अकबर ने सभी धर्मों के उत्तम सिद्धान्तों को लेकर दीन-ए-इलाही' नामक नये धर्म की स्थापना की। 
    • अकबर के दरबार में 'नवरत्न' के नाम से प्रसिद्ध नौ प्रसिद्ध व्यक्ति थे बीरबल, मानसिंह, फैजी, टोडरमल, अब्दुर्रहीम खानखाना, अबुल फजल, तानसेन, भगवान दास, मुल्ला दो प्याजा। 
    • अकबर के पुत्र, सलीम के विद्रोह के कारण अकबर के अन्तिम दिन दुःख भरे व्यतीत हुए। 
    • 1605 ई० में अकबर की मृत्यु हो गयी। अकबर के मकबरे का निर्माण जहाँगीर द्वारा आगरा के निकट सिकन्दरा' नामक स्थान पर कराया गया।

    जहाँगीर (1605-1627 ई.)

    • इसके बचपन का नाम सलीम था।
    • जहाँगीर का विवाह 1611 ई. में शेर-ए-अफगान की विधवा महरूनिश से हुआ जो बाद में नूरजहाँ के नाम से प्रसिद्ध हुई।
    • जहाँगीर ने शहजादे खुर्रम को महाराणा प्रताप के पुत्र अमर सिंह के विरुद्ध सैन्य अभियान का जिम्मा सौंपा.जिसमें सफलता प्राप्त करके अमर सिंह को सन्धि के लिए बाध्य कर दिया। 
    • सिंहासन पर बैठते ही जहाँगीर के पुत्र खुसरो ने विद्रोह कर दिया जिसे जहाँगीर ने पकड़ कर अंधा कर दिया।
    •  कुछ समय बाद खुर्रम ने खुसरो की हत्या करवा दी।
    •  जहाँगीर ने सिक्खों के पांचवें गुरु, गुरु अर्जुन देव को, शहजादे खुसरो की सहायता करने के कारण फांसी लगवा दी। 
    • जहाँगीर ने निसार नामक सिक्के का प्रचलन किया। 
    • जहाँगीर के शासन काल में मुगल चित्रकला चरमोत्कर्ष पर थी।
    •  उसने राज्य की जनता को न्याय दिलाने हेतु न्याय की प्रतीक सोने की जंजीर को अपने महल के बाहर लगवाया। 
    • जहाँगीर ने फारसी में अपनी आत्मकथा 'तुजुक-ए-जहाँगीरी' की रचना की। 
    • जहाँगीर के शासनकाल में प्रथम अंग्रेज मिशन कैप्टन हाकिन्स के नेतृत्व में मुगल दरबार में आया (1608-1611 ई०) जो व्यापारिक अनुमति प्राप्त नहीं कर सका। 
    • सर टॉमस रो के नेतृत्व में दूसरा मिशन भारत आया (1615-1618 ई०) जो व्यापारिक अनुमति प्राप्त करने में सफल रहा। इसी के शासन काल में अंग्रेजों ने 'सूरत' में प्रथम व्यापार केन्द्र की स्थापना। 
    • 1627 ई. में जहांगीर की मृत्यु हो गयी। 
    • जहांगीर के  मकबरा का निर्माण नूरजहां ने लाहौर के निकट शाहदरा नामक स्थान पर करवाया। 

    शाहजहां (1627-1658 ई.)

    • शाहजहाँ (1627-1658 ई०) उनके बचपन का नाम खुर्रम था।
    • उनका विवाह नूरजहाँ के भाई आसफ खां की पुत्री अर्जुमंद बानो बेगम से हुआ,जो मुमताज महल के नाम से प्रसिद्ध हुई। 
    • जहाँगीर के सबसे छोटे बेटे शहरयार का विवाह नूरजहाँ के पहले पति से उत्पन्न पुत्री से हुआ।
    • नूरजहाँ एवं शाहजहाँ समूहों में उस वक्त प्रतिद्वन्दिता शुरू हो गयी जब नूरजहाँ व आसफ खां ने अपने-अपने दामादों को मुगल सिंहासन पर बैठाने का प्रयास किया। 
    • शाहजहाँ ने आसफ खां की सहायता से सिंहासन पर अधिकार कर लिया।
    • शाहजहाँ ने दिल्ली के निकट शाहजहाँनाबाद नगर की स्थापना की और आगरा से राजधानी इस स्थान पर परिवर्तित की। इसे आजकल पुरानी दिल्ली के नाम से जाना जाता है।
    •  इसी में उसने सुरक्षा दुर्ग का निर्माण कराया जिसे 'लाल किला' या 'किला-ए-मुबारक' के नाम से जाना जाता है।
    • उसने इसी किले में दीवान-ए-आमदीवान-ए-खास का निर्माण करवाया।
    • उसने स्वयं अपना व अपनी बेगम मुमताज महल का मकबरा आगरा में बनवाया जो ताजमहल' के नाम से प्रसिद्ध है।
    •  ताजमहल का वास्तुविद् उस्ताद ईसा खाँ था। 
    • इसके निर्माण में प्रयुक्त होने वाला संगमरमर मकराना (राजस्थान) से प्राप्त हुआ।
    • ताजमहल का निर्माण 1632-1653 ई. के बीच हुआ।
    •  इसके अलावा शाहजहाँ ने आगरा में मोती मस्जिद तथा दिल्ली में जामा मस्जिद का निर्माण करवाया (लाल किले में स्थित मोती मस्जिद का निर्माण औरंगजेब ने करवाया था )। 
    • शाहजहाँ के शासन काल को द्वितीय स्वर्ण काल कहा जाता है। 
    • शाहजहाँ के पुत्र दारा शिकोह, शुजा, मुराद व औरंगजेब थे। 
    • दारा शिकोह एक विद्वान व्यक्ति था। उसने उपनिषदों का फारसी में अनुवाद किया।
    • शाहजहाँ के बीमार होने पर उसके पुत्रों में उत्तराधिकार प्राप्त करने के लिए  युद्ध शुरू हो गया।
    • 1658 ई० में औरंगजेब ने विजय प्राप्त करते हुए राजधानी पर अधिकार कर लिया था शाहजहाँ को गिरफ्तार कर आगरा किले में कैद कर दिया, इसी स्थान पर 1666 ई० में शाहजहाँ की मृत्यु हो गयी।


    औरंगज़ेब (1658-1707 ई.) 

    • सिहांसन पर बैठने से पहले यह दक्षिण भारत का गवर्नर था।
    •  यह औरंगजेब आलमगीर के नाम से सिंहासन पर बैठा।
    • उसने उलेमा वर्ग की सलाह के अनुसार इस्लामी ढंग से राज किया। 
    • उसने नौरोज  उत्सव तथा झरोखा दर्शन जो अकबर ने शुरू कि समाप्त कर दिया। 
    • उसने राज्य को गैर-मुस्लिम नेता पर पुनः जजिया' लगा दिया।
    • औरंगजेब ने हिन्दू त्यौहारों को सार्वजनिक रूप से मनाये जाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया। 
    • उसने राज्य में सार्वजनिक रूप से नृत्य तथा संगीत पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया (यद्यपि  व्यक्तिगत जीवन में वह खुद एक कुशल वीणा वादक था )। 
    •  अपने व्यक्तिगत चारित्रिक गुणों के कारण औरंगजेब को 'जिन्दा पीर के नाम से जाना जाता है। 
    • उसने 1656 ई० में बीजापुर तथा 1687 ई० में गोलकुण्डा को जीतकर मुगल साम्राज्य में मिला लिया। 
    • औरंगजेब के समय में मुगल साम्राज्य क्षेत्रफल की दृष्टि से चरमोत्कर्ष पर था। 
    • औरंगजेब ने अपनी बेगम केआग्रह पर ताजमहल की प्रतिकृति का निर्माण किया जिसे बीवी का मकबरा या द्वितीय ताजमहल के नाम से जाना जाता है। यह औरंगाबाद में स्थित है।
    • औरंगजेब को मृत्यु 1707 ई० में हुई।
    • उसका मकबरा औरंगाबाद में स्थित ।

    औरंगज़ेब के उत्तराधिकारी 

      औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात् जो मुगल शासक आये वे सभी सामान्यतः  अयोग्य दे।
        1. बहादुर शाह प्रथम (1707-1712 ई.)
          2. जहान्दर शाह (1712-1713 ई०)

          3. फर्रुखसियर (1713-1719 ई०)
            4. मुहम्मद शाह (1719-1748 ई०) मिस्र के राजा नादिरशाह ने करनाल के युद्ध (1739 ई०) में हराया था और मयूर सिंहासन और कोहिनूर हीरा भारत से ले गया था।
              5. अहमदशाह (1748-1754 ई०)
                6. आलमगीर द्वितीय (1754-1759 ई०)
                  7. शाहआलम द्वितीय (1759-1806 ई०) : इसने अवध के नवाब शुजाउद्दौला और बंगाल के नवाब मीर कासिम के साथ मिलकर 1764 ई० में अंग्रेजों के विरुद्ध बक्सर का युद्ध लड़ा, परन्तु हार  गया था
                    8. अकबर द्वितीय 18061837 ई.)
                      9. बहादुर शाह द्वितीय (1837-1857 ई.) 

                      • जहान्दर शाह ने व्यापारिक गतिविधियों के उद्देश्य से अंग्रेजों के लिए 'फरमान पर हस्ताक्षर किये। 
                      • अकबर द्वितीय ने 1833 ई० में राजा राममोहन राय को अपनी पेंशन बढ़वाने इंग्लैण्ड भेजा।
                      • अन्तिम मुगल सम्राट बहादुर शाह द्वितीय जफर ने 1857 ई. के विद्वा का केन्द्रीय नेतृत्व किया।
                      •  विद्रोह के दमन के बाद बहादुर शाह जफर को उसकी पत्नी जीनत मईत के साथ बर्मा के रंगून स्थित मांडले जेल में रखा गया।
                      •  उसकी मृत्यु वहीं हुई एवं उसका मकबरा रंगुन में हो स्थित है।

                      E-gyankosh

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