सूरी, तथा मराठा वंश (Sur And Maratha Dynasty )

सूरी, तथा मराठा वंश (Sur And Maratha Dynasty )

सूरी मराठा तथा  वंश 

सूरी वंश (1540-1555 ई.)

शेरशाह सूरी (1540-1545)

  • शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को हराकर 1540-1545 ई० तक भारत पर राज
  •  किया। 
  • शेरशाह का असली नाम फरीद था। उसे शेरखान की उपाधि बाबरखान लोहानी ने दी थी।
  •  कालिंजर का अभियान, शेरशाह का अन्तिम सैन्य अभियान था। इसमें एक गोले के विस्फोट से शेरशाह की मृत्यु हो गयी थी (1545 ई.)।
  • शेर शाह मारवाड़ के राजा मालदेव की गतिविधियों से विशेष रूप से प्रभावित थे।  1544 में सामल की लड़ाई में शेर शाह उसे बेहतर मिला।
  •  शेरशाह के काल में ने हिन्दी में 'पद्मावत' की रचना की थी। 
  • शेरशाह सूरी ने सिन्धु नदी से बंगाल तक शेरशाह सूरी मार्ग (ग्रांट ट्रंक रोड) का निर्माण करवाया था।
  •  शेरशाह का मकबरा सहसराम (बिहार) में स्थित है । 
  • शेरशाह ने व्यापार यातायात एवं डाक सुविधा की दृष्टि से अनेक सरायों का निर्माण कराया। 
  • इनके चारों ओर बाजारों का विकास किया गया भूमि को उत्पादकता के आधार पर उत्तम,मध्यम व निकृष्ट श्रेणी में वर्गीकृत किया। भूमि को मापने में 'सिकन्दरी-गज' का प्रयोग किया जाता था।
  •  उपज का 1/3 भाग, भूमि कर निश्चित किया। सीमा शुल्क लेने की सुविधा दो जगहों पर की गयी थी- ।                                  (1) सीकरी गली पर (बंगाल व बिहार की सीमा पर) (2) सिन्धु नदी पर (प. एशिया व केन्द्रीय एशिया से आने वाली वस्तुओं के लिए )।
  • चाँदी का 'रुपया' व ताँबे का 'दाम' प्रचलित किया। 
  • यमुना नदी के किनारे पर एक नगर की स्थापना की (वर्तमान समय का पुराना किला)।
  •  अब्बास खान शेरवानी उसका इतिहासकार था (शेरवानी ने तारीख-ए-शेरशाही) लिखी।
  • इस वंश का आखिरी शासक सिकंदर शाह था, जिसे हुमायूं ने 1555 में हरा दिया ।

मराठा वंश 

  • मराठा शक्ति का उदय शिवाजी के नेतृत्व में 17वीं शताब्दी में हुआ। 
  • शिवाजी का जन्म 1627 ई० में पुणे के शिवनेर किले में हुआ। शिवाजी के पिता शाहजी भोंसले और माता जीजाबाई थी। 
  • शिवाजी के व्यक्तित्व पर सर्वाधिक प्रभाव संरक्षक दादाजी कोण्डदेव का पड़ा था।
  • शिवाजी के गुरु समर्थ स्वामी रामदास थे। शिवाजी ने धीरे-धीरे अलग-अलग दुर्ग पर अधिकार करके अपनी ताकत बढ़ायी। 
  • बीजापुर के सुल्तान अली आदिल शाह ने अफजल खान को शिवाजी को सबक सिखाने के लिए भेजा। परन्तु शिवाजी ने उसे मार दिया। 
  • इसी तरह औरंगजेब द्वारा भेजे गये शाइस्ता खां को भी शिवाजी ने भगा दिया। 
  • औरंगजेब ने 1665 ई. में राजा जयसिंह को शिवाजी से लड़ने के लिए भेजा।  राजा जयसिंह ने शिवाजी को पुरन्दर की संधि करने पर विवश किया जिसमें शिवाजी के काफी दुर्ग मुगलों के पास चले गये।
  • शिवाजी को 1666 ई० में उनके पुत्र संभाजी के साथ आगरा में नजरबन्द भी किया गया परन्तु वे वहाँ से भाग निकले।
  • 1674 ई० में शिवाजी ने रायगढ़ के दुर्ग में महाराष्ट्र के स्वतन्त्र शासक के रूप में अपना राज्याभिषेक कराया और छत्रपति' की उपाधि महण की।
  • 12 अप्रैल,1680 ई० को शिवाजी की मृत्यु हो गयी
  • शिवाजी के प्रशासन की मुख्य विशेषता 'अष्ट प्रधान' यानि उनके आठ प्रमुख मंत्री थे।


E-gyankosh

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