बी. के. एस. अयंगर एक योगगुरु

बी. के. एस. अयंगर एक योगगुरु

बी. के. एस. अयंगर/योग -

योग शब्द का इतिहास कई पुराना और रंगो से भरा हुआ है कई महान योगियों ने इसमें अपनी जगह बनाई जिसमे एक नाम आता है बेल्लूर कृष्णामचार सुंदरराजा अयंगर का इन्होने आधुनिक योग को एक नया मुकाम दिया। भारत अपनी योग संस्कृति के कारण विश्व भर में विख्यात है। योग जो कि एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिसमें शरीर मन और आत्मा को एक साथ जोड़ने का काम होता है। माना जाता है कि योग के जनक आदियोगी शिव और गुरु दत्तात्रेय है। महर्षि पतंजलि योगसूत्र के रचनाकार हैं तथा राजा भोज ने महर्षि पतंजलि के लिए कहा (इस श्लोक को योगाभ्यास के शुरू में गाया जाता है)-

"योगेन चित्तस्य पदेन वाचां । मलं शरीरस्य च वैद्यकेन ॥
योऽपाकरोत्तमं प्रवरं मुनीनां । पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोऽस्मि ॥"

अर्थात मन की चित्त वृत्तियों को योग से, वाणी को व्याकरण से और शरीर की अशुद्धियों को आयुर्वेद द्वारा शुद्ध करने वाले मुनियों में सर्वश्रेष्ठ महर्षि पतञ्जलि (पतंजलि) को में दोनों हाथ जोड़कर नमन करता हूँ। 

अयंगर का प्रारंभिक जीवन व चुनौतियां-

अयंगर का जन्म 14  दिसंबर 1918 को बेल्लूर कर्नाटक में हुआ था।  पारिवारिक स्थिति बेहद कमजोर थी और बचपन पूरा गरीबी में गुजरा, बचपन में अयंगर मलेरिया,टायफॉइड और क्षय रोग से ग्रसित थे और अपने सिर  को मुश्किल से खड़ा कर पाते थे शारीरिक स्थिति इतनी दयनीय थी कि दोस्तों में हंसी का पात्र बन जाते, दोस्त कम थे इसलिए स्कूली शिक्षा में परेशानी का सामना करना पड़ा अपनी शारीरिक स्थिति को सुधारने उन्होंने योग की और रुख किया मात्र 16 साल की आयु में योगगुरु टी. कृष्णमाचार्य जी से योग की शिक्षा लेना प्रारंभ कर दिया और यह उनके जीवन का परिवर्तनीय फैसला साबित हुआ जो बीमारियां कई रुपयों के दम पर दूर नहीं हो पायी वह योग से दूर हो गयी और फिर उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा उन्होंने 200 योग आसनो में महारत हासिल की। सन  1952 में विओलिनिस्ट यहूदी मेनुहिन को बी. के. एस. अयंगर ने योग शिखाया , मेनुहिन ने अयंगर का परिचय पश्चिम से कराया तथा 1965 में 'Iyengar's treatise Light on Yoga' लिखी जिसमे उन्होंने अयंगर के 600 चित्रों का प्रयोग किया जिसमे योगासन की मुद्राओं को करने का तरीका बताया गया था। इनके योगासन को  यूरोप तथा अमेरिका में बहुत पसंद किया गया। 
BKS Iyengar
बी. के. एस. अयंगर 

योग के प्रति कार्य और समर्पण-

अयंगर मुख्य रूप से हठ योग सिखाया करते थे जिसमे कई तरह की आसन , सांसो पे नियंत्रण तथा ध्यान समाहित थे जिससे मस्तिष्क का विकास, शारीरिक विकास तथा आध्यात्मिक विकास हो। उन्होंने योग को करने के लिए विभिन्न्न प्रॉप्स का भी इस्तेमाल करना सिखाया जैसे- ब्लॉक्स, कुर्सी, कम्बल इत्यादि। 1975 में पुणे में एक योग शिक्षा संस्थान का निर्माण किया जिसका नाम उन्होंने अपनी पत्नी के नाम पर "राममणि अयंगर मेमोरियल योगा इंस्टीटूड" रखा। और 21 शताब्दी में कदम रखते रखते उन्होंने अपना साम्राज्य दुनिया भर में  200  से भी अधिक योग केंद्र तथा कई हजार योग अध्यापको तथा लाखों छात्रों तक फैला दिया।   
बी. के. एस. अयंगर


 
अयंगर ने योग साधना के ऊपर 14 किताबें लिखी है जिनमें से कुछ पुस्तकें निम्नलिखित है-
  • द आर्ट ऑफ़ योगा (1985)
  • लाइट ऑन द योगा  सुत्रास ऑफ़ पतंजलि (1993)
  • लाइट ऑन  लाइफ: द योगा जर्नी टू व्होलेनेस , इनर पीस एंड अल्टीमेट फ्रीडम (2005)
  • कोर ऑफ़ योगा सूत्र: द डेफिनेटिव गाइड टू द फिलोसोफी ऑफ़ योगा (2012)
अयंगर ने भारत के तीन उच्च अवार्ड्स से नवाजा गया जिसमें , 1991 में पद्म श्री, 2002 में पद्म विभूषण तथा 2014 में पुनः पद्म विभूषण। 
बी. के. एस. अयंगर

कुछ आखिरी यादें-

योग का हठ कुछ इस प्रकार था कि 90 साल की उम्र में भी 4 से 6 घंटे योग किया करते थे। जिसमे 1 घंटा तो सिर्फ प्रायाणाम होता था तथा उनके आसनों को नवयुवक भी न कर पाए शरीर को पूरी तरह लचीला बनाया था वह बालक जिसकी शारीरिक स्थिति पर उसके सहपाठियों द्वारा मजाक बनाया जाता था अब वह बालक 90 की उम्र में भी उन सहपाठियों से बेहतर शारीरिक स्थिति बनाये हुए थे। देश तथा दुनिया भर के नामचीन हस्तियों ने अयंगर को अपना गुरु माना था। 95 वर्ष की आयु में 20 अगस्त 2014 में पुणे, महाराष्ट्र में योगगुरु अयंगर पंचतत्व में विलीन हो गए और अपने साथ छोड़ गए योग की शिक्षाए और और एक ऐसा इतिहास जो योगशिक्षा को मजबूत करने वाला था। उनके योग के प्रति इसी समर्पण के कारण वह विश्व भर में योग गुरु के रूप में विख्यात है। 
 

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