मौलिक अधिकार (Fundamental Rights In Hindi)

मौलिक अधिकार (Fundamental Rights In Hindi)

मौलिक अधिकार अथवा मूल अधिकार-

भारत एक लोकतान्त्रिक देश है और हर लोकतान्त्रिक देश में वह के लोगो को कुछ मौलिक अधिकार प्राप्त होते है जिन्हें मूल अधिकार के नाम से भी जाना जाता है। भारत के संविधान में इन मूल अधिकारों अथवा मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है। हर देशवाशी को यह अवश्य मालूम होना चाहिए कि  "उसके मौलिक अधिकार कितने है?, इन मौलिक अधिकारों की विशेषता क्या है?, और उसके जीवन में मौलिक अधिकारों का क्या महत्व है? क्या मूल अधिकार मूल कर्तव्य को बया करते है?" । मूल संविधान (1950) में सात मौलिक अधिकार थे। लेकिन जैसा कि हमेशा ही संविधान को और अधिक सरल व कारगर बनाने की कोशिश की जाती आ रही है उसी प्रकार इन मौलिक अधिकारों में भी संसोधन हुआ और 44 वें संशोधन के बाद 1978 में इन्हें छः कर दिया गया। जिसमे से सम्पति के अधिकार को हटाकर उस अधिकार के अनुच्छेद 300 (a)  के अंतर्गत समावेशित कर दिया गया है जो कि एक कानूनी अधिकार है न कि मौलिक अधिकार ।संविधान के भाग 3 (अनुच्छेद 12 से अनुच्छेद 35) में  मौलिक अधिकारों का वर्णन मिलता है। सामान्य स्थिति में कोई भी सरकार इन्हे सिमित नहीं कर सकती है। अपितु कुछ स्थितियों में इनपर भी प्रतिबन्ध लगाया जा सकता है, जैसे राष्ट्रीय आपात के दौरान (अनुच्छेद 352) जीवन एवं व्यक्तिगत  स्वतंत्रता के अधिकार को छोड़कर अन्य मौलिक अधिकारों को स्थगित किया जा सकता है। मौलिक अधिकार भारतीय संविधान में अमेरिकी संविधान से लिए गए हैं। संविधान में वर्णित छः मौलिक अधिकार निम्न लिखित हैं- 

  1. समानता का अधिकार ( अनुच्छेद 14-18 )
  2. स्वतंत्रता का अधिकार ( अनुच्छेद 19-22 )
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार ( अनुच्छेद 23 एवं 24 ) 
  4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार  ( अनुच्छेद 25-28 )
  5. सांस्कृति एवं शैक्षिक अधिकार  ( अनुच्छेद 29 एवं 30 )
  6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार  ( अनुच्छेद 32 )
मौलिक अधिकार (संविधान)
मौलिक अधिकार (संविधान)


1. समानता का अधिकार 

संविधान के अनुच्छेद 14 से 18 तक समानता के अधिकार से संबंधित है, अनुच्छेद 14 में कहा गया है कि राज्य किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता से वंचित नहीं करेगा तथा भारत के किसी भी क्षेत्र में उन्हें समान रूप से कानून के द्वारा सुरक्षा प्राप्त होगी। इस प्रकार यह अधिकार सभी व्यक्तियों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार प्रदान करता है। किसी भी व्यक्ति, धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म के स्थान पर उनके साथ भेदभाव नहीं किया जायेगा। अनुच्छेद 15,16,17, और 18 सामाजिक एवं आर्थिक समानता से संबंधित है। अनुच्छेद 15 राज्य को किसी भी व्यक्ति के विरूद्ध धर्म, भाषा, जाति के आधार पर भेदभाव करने को  निषेध मानता है। यह समानता का अधिकार किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थानों, रेस्टोरेंन्ट होटल, दुकान या मनोरंजन के स्थानों, कुंओं इत्यादि का प्रयोग करने में किसी भी प्रकार के भेदभाव को निषेध मानता है।

अनुच्छेद 16 सभी नागरिकों को समान अवसर प्रदान करने का आश्वासन देता है । राज्य किसी भी नागरिक को धर्म, जाति, लिंग, नस्ल या जन्म स्थान के आधार पर रोजगार के मामलों में भेदभाव नहीं कर सकता है। अनुच्छेद 17 के अंतर्गत अस्पृश्यता या छुआछूत का पूर्ण रूप से प्रतिबंध किया गया है किसी भी प्रकार की छुआछूत को कानूनी रूप से दंडनीय अपराध माना गया हैं। अनुच्छेद 18 के अंतर्गत राज्य किसी भी प्रकार को उपाधि नहीं देगी सिवाय सेना या शैक्षिक प्रतिष्ठा के अलावा। 

2. स्वतंत्रता का अधिकार

स्वतंत्रता का अधिकार  का वर्णन संविधान के अनुच्छेद 19 से अनुच्छेद 22 में किया गया है।  स्वतंत्रता का अधिकार अपने आप में पूर्ण नहीं है। यह कानूनी रूप से नियंत्रित अधिकार है। अनुच्छेद 19 में निम्नलिखित अधिकार दिये गये है:-

  • भाषण एवं अभिव्यक्ति की आजादी इसका मुख्य उद्देश्य भारत की एकता एवं संप्रभुता की रक्षा करना, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध, कानून और व्यवस्था नैतिकता स्थापित करना, तथा सार्वजनिक संपत्ति को गंदा ना करना या किसी गलत कार्य को उकसाना इत्यादि।
  •  बिना हथियारों के शांतिपूर्ण तरीके से एकत्रित होना यह भारत की सुरक्षा, एकता एवं अखंडता को सुनिश्चित करता है, तथा शांति व्यवस्था कायम रखता है। 
  •  संघ एवं संगठनों को गठित करना, यह भारत की संप्रभुता एवं एकता को संयोजित रखता है तथा लोक नैतिकता को भी बनाये रखता है। यह "सहयोगिक समाज जो कि 2012 में 97वें संशोधन के द्वारा जोड़ा गया था. को भी शामिल करता है।
  •  भारत के किसी भी क्षेत्र में मुक्त भ्रमण करना इससे आम नागरिक एवं अनुसूचित जनजातियों के हितों को सुरक्षित रखा जाता है। 
  •  भारत के किसी भी भूभाग में निवास करना या स्थायी आवास बनाना। तथा
  • किसी व्यवसाय को शुरू करना, किसी भी कारोबार, व्यापार या व्यवसाय को करना, यह शिक्षित व्यवसाय पर आधारित होता है। इसके लिए योग्यता होना आवश्यक है।

अनुच्छेद 20, 21 एवं 22 व्यक्तियों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है। सभी मौलिक अधिकारों में यह (स्वतंत्रता का अधिकार) केन्द्रिय अधिकार है, अर्थात् जीवन का अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार। 2002 में न्यायपालिका ने इस अधिकार की सही तरीके से व्याख्या की थी। इसके अतिरिक्त, 2002 में 86 वें संविधान में हुए संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 21 ए को भी जोड़ा गया था जिसमें राज्य छह वर्ष से चौदह वर्ष के बीच के बच्चों के लिए अनिवार्य एवं मुफ्त शिक्षा की गांरटी प्रदान करता है। पहले यह नीति-निर्देशक तत्वों के अनुच्छेद 45 में शामिल था। अनुच्छेद 20 राज्य द्वारा गैर कानूनी तरीके से पीड़ित व्यक्ति को मुफ्त सुनवायी की व्यवस्था का प्रावधान करता है।  अनुच्छेद 22 के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के खंड बनाये गये हैं जिसमें किन्हीं मामलों में गिरफ्तारी एवं सजा से संरक्षण प्रदान किया गया है।

3. शोषण के विरूद्ध अधिकार 

भारत के संविधान में मौलिक अधिकारों के अंतर्गत अनुच्छेद 23 एवं 24 शोषण के विरुद्ध अधिकार से संबंधित है। अनुच्छेद 23 बाल शोषण, बेगार तथा बंधुआ मजदूरी पर रोक लगाता है। अनुच्छेद 24 के अनुसार, 14 वर्ष से कम की आयु के बच्चों को किसी भी फैक्ट्री, कारखाने, या हानिकारक व्यवसाय में रोजगार नहीं दे सकते या उन्हें काम पर नहीं रख सकते हैं। 

4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

मौलिक अधिकारों के अंतर्गत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार भी आता है और संविधान का अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है । सभी व्यक्तियों को किसी भी धर्म की पूजा, उपासना करने का अधिकार प्राप्त है। लेकिन यह स्वतंत्रता नैतिकता, सार्वजनिक व्यवस्था एवं स्वास्थ्य पर निर्भर है इसके अलावा संविधान के भाग तीन में दिये गये प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिये। इस अनुच्छेद के अनुसार कोई भी निर्धारित कानून इसको प्रभावित नहीं करेगा तथा राज्य को भी कानून बनाने से कोई भी रोक नहीं सकता।
  • किसी भी आर्थिक, वित्तिय, राजनीतिक या अन्य धर्मनिरपेक्ष कार्य को नियमित करना जो कि धार्मिक कार्यों से संबंधित हो।
  • सामाजिक कल्याण और सुधार प्रदान करना या हिंदू धार्मिक संस्थाओं को सभी वर्गो के लिए खोलना।
विवेक की स्वतंत्रता को दो अनुच्छेदों द्वारा मजबूत बनाया गया है ये अनुच्छेद है 27 एवं 28 हैं । अनुच्छेद 27 में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि या रखरखाव में व्यय के लिये कोई कर अदा करने के लिये बाध्य नहीं किया जायेगा। अर्थात यदि करों का इस्तेमाल सभी धर्मों की अभिवृद्धि के लिये किया जाता है तो कोई आपत्ति नहीं हो सकती। अनुच्छेद 28 पूर्णतया राज्य निधि से संचालित शैक्षिक संस्थाओं में कोई धार्मिक शिक्षा देने का पूर्णतः विरोध करता है। राज्य से मान्यता तथा सहायता प्राप्त संस्थाओं के मामलों में, प्रत्येक व्यक्ति को धार्मिक शिक्षा या उपासना में उपस्थित न होने की स्वतंत्रता होगी।

5. सांस्कृति एवं शैक्षिक अधिकार 

मौलिक अधिकारों की सूची में आने वाले संविधान के अनुच्छेद 29 एवं 30 संस्कृति और शिक्षा के अधिकार से संबंधित है। अनुच्छेद 29 भारत में कहीं भी निवास करने वाले नागरिकों के प्रत्येक वर्ग को जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि, या संस्कृति है, उसे बनाए रखने के अधिकार का आश्वासन देता है। किसी भी नागरिक को राज्य द्वारा संचालित या उससे सहायता प्राप्त किसी भी शिक्षा संस्था में केवल धर्म, मूलवंश जाति या भाषा के कारण प्रवेश देने से इंकार नहीं किया जा सकता। अनुच्छेद 30 के अनुसार धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी रूचि की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और उनके प्रबंध का अधिकार होगा।

6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार 

"संवैधानिक उपचारों का अधिकार को डॉ. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने संविधान की आत्मा कहा है।" 

अक्सर यह सवाल हर किसी  के मन में उठते है कि 1. बंदी प्रत्यक्षीकरण क्या है? 2.  परमादेश क्या है? 3. निषेद्याज्ञा अथवा प्रतिषेध क्या है? 4. अधिकार पृच्छा क्या है? 5. उत्प्रेषण क्या है? इन सभी सवालों के जवाब हमें संवैधानिक उपचारों का अधिकार खंड में मिलते है। संविधान के अनुच्छेद 32 के अनुसार  संविधान मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिये समुचित कार्यवाही द्वारा देश के सर्वोच्च न्यायालय  का द्वार खटखटाने  के अधिकार की गारंटी देता है। उच्चतम न्यायालय जिन उपायों से  मूल अधिकारों की रक्षा करता है उन्हें याचिका  या न्यायिक प्रक्रिया कहा जाता है। रिट या न्यायिक प्रक्रिया इस प्रकार है-  बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार पृच्छा और उत्प्रेषण रिट। सर्वोच्च न्यायालय मूल अधिकारों को लागू कराने के लिये इन याचिकाओं का आदेश दे सकता है। इन रिटों का अर्थ इस प्रकार है :
  • बंदी प्रत्यक्षीकरण - यह रिट(बंदी प्रत्यक्षीकरण ) जीवन के अधिकार की रक्षा करती है तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सुरक्षित रखती है। यह रिट न्यायालय द्वारा जारी की जाती है, यदि किसी व्यक्ति को बिना किसी सुनवायी के हिरासत में ले लिया गया हो तो उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता है यह कार्यपालिका को चुनौती देती है यदि कार्यपालिका ने किसी व्यक्ति को कानून के विपरीत हिरासत में लिया हो। यह रिट कानून को भी चुनौती देती है यदि यह कानून गैर संविधानिक है न्यायालय ऐसे व्यक्ति को बरी कर सकता है यदि उसे गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया हो। यदि इस रिट का उल्लंघन किया तो यह कोर्ट की अवमानना मानी जायेगी तथा उसे सजा भी मिल सकती है।
  • परमादेश- परमादेश का अर्थ है आदेश। यह किसी भी अधिकारी द्वारा जारी किया जा सकता है। इसके द्वारा किसी भी व्यक्ति को अपनी डयूटी पूरी करने के लिये कहा जाता है जो कि उसने करने से मना कर दिया हो। यह आदेश राष्ट्रपति, राज्यों के राज्यपाल, तथा सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के विरुद्ध जारी नहीं किया जा सकता । यह किसी व्यक्तिगत या निजी संस्था के विरुद्ध भी नही जारी किया जा सकता।
  •  प्रतिषेध - यह रिट(प्रतिषेध) उच्च न्यायालय द्वारा जारी की जाती है। सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय निम्न कोर्ट को यह रिट जारी करता है। यह निम्न कोर्ट को अपने अधिकार क्षेत्र में सुनवायी के लिए किसी केस को निषेध मानती है। इसे  निषेद्याज्ञा के  नाम से भी जाना जाता है। 
  • अधिकार पृच्छा - इस रिट(अधिकार पृच्छा) के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय किसी निम्न कोर्ट द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र में रखे गये रिकार्ड को मंगा सकती है। ) 
  • उत्प्रेषण - इस रिट(उत्प्रेषण) के माध्यम से कोर्ट किसी व्यक्ति से उसके बारे में पूछ सकता है कि किस अधिकार क्षेत्र से वह किसी कार्यालय अथवा सत्ता में आसीन है।
प्रारम्भ में पूछे गए इक प्रश्न जिसमे यह कहा गया था कि क्या मूल अधिकार  कर्तव्य को बया करते है? का उत्तर है नहीं।  अक्सर मूल शब्द के कारण लोग यह सोचते है कि मूल अधिकार और मूल कर्तव्य एक है परन्तु मूल अधिकार संविधान के अंतर्गत वर्णित कुछ अनुच्छेद  है जो अधिकारों का वर्णन करते है।  जब्कि किसी भी व्यक्ति का मूल कर्तव्य संविधान का पालन करना तथा इसके हितो की रक्षा करना है इसके साथ ही अनेक मूल कर्तव्यों को इस सूची में जोड़ा गया है। 

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