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मानहानि अथवा डिफेमेशन का केस

मानहानि अथवा डिफेमेशन का केस

क्या है मानहानि और किस पर किया जा सकता है केस?

अक्सर आप लोगों ने सुना होगा कि किसी व्यक्ति ने किसी अन्य व्यक्ति पर मानहानि का दावा/केस किया है, या डिफेमेशन केस किया है। डिफेमेशन केस होता क्या है या मानहानि क्या होता है? केस कब किया जाता है? और किन परिस्थितियों में दूसरे व्यक्ति के ऊपर मानहानि का केस किया जा सकता है?

 मानहानि का केस  समझने के लिए हम को भारतीय दंड संहिता (इंडियन पेनल कोड) की धारा (सेक्शन) 499 तथा भारतीय दंड संहिता (इंडियन पैनल कोर्ट) की धारा (सेक्शन) 500, को जानना आवश्यक है। भारतीय दंड संहिता के अनुसार धारा (सेक्शन) 499 के तहत मानहानि को परिभाषित किया गया है तथा धारा (सेक्शन) 500 में मानहानि में होने वाली सजा/दंड को दिया गया है।


भारतीय दण्ड संहिता
आईपीसी 1860


मानहानि क्या होता है? 

जैसा कि शब्द मानहानि से ही हम समझ सकते हैं कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा का अपमान होना या छवि को खराब करना होता है। अगर इसको भारतीय दंड संहिता धारा 499 में लिखे गए वक्त्यव से समझा जाए तो यह इस प्रकार है-

"Whoever, by words either spoken or intended to be read, or by signs or by visible representations, makes or publishes any imputation concerning any person intending to harm, or knowing or having reason to believe that such imputation will harm, the reputation of such person, is said, expected to defame that person."

"जो कोई भी, बोले गए या पढ़ने के इरादे से, या संकेतों या दृश्य प्रतिनिधित्व द्वारा, किसी भी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने का इरादा रखता है, या यह जानते हुए कि इस तरह के लांछन से ऐसे व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान होगा , तो यह कहा जा सकता है कि वह व्यक्ति उस को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। "

ऊपर दी की परिभाषा के अनुसार अगर कोई भी व्यक्ति किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है तो उस पर मानहानि का दावा किया जा सकता परंतु क्या किसी सच बोलने वाले व्यक्ति जिसके सच से किसी व्यक्ति की छवि खराब हो रही हो क्या ऐसे व्यक्ति के ऊपर भी मानहानि का केस किया जा सकता है ?

कब कब किया जा सकता है मानहानि का केस?

भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत ऐसे प्रावधान दिए गए हैं जिसके तहत ही किसी व्यक्ति पर मानहानि का केस अथवा दावा किया जा सकता।

1. किसी भी मृतक व्यक्ति पर लगाया गया आरोप मानहानि के अंतर्गत आ सकता है।
2. ऐसे बेबुनियाद आरोप भी मानहानि के अंदर आ सकते हैं जिसके वजह से किसी भी व्यक्ति या उसके परिवार, उसके संबंधियों की छवि का नुकसान हो।
3. किसी भी संस्था पर अथवा आदमियों के समूह पर लगाया गया बेबुनियाद इल्जाम भी मानहानि की श्रेणी में आ सकता है।
4. किसी भी व्यक्ति की जाति, धर्म, काष्ट, क्रीड अथवा रेस पर की गयी कोई भी टिपण्णी जो मनुष्य के अपमान का कारण बनता हो मानहानि के अंदर आ सकता है।

कब कब नहीं किया जा सकता केस?

ऊपर दिए गए सभी प्रावधान मानहानि की श्रेणी में आते हैं अगर वह नीचे दिए गए प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आते।
1. अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई भी सच प्रकाशित किया जाता है जिसको उस समाज को जानना जरूरी है तो वह मानहानि के अंदर नहीं आता।
2. सरकारी सेवकों से कोई भी प्रश्न पूछना चाहे वह उनके चरित्र पर हो या कर्तव्य निर्वहन पर यह मानहानि के अंदर नहीं आता।
3. "न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति पर दिया गया आदेश" अगर इसको कोई व्यक्ति प्रकाशित करता है तो उस व्यक्ति पर मानहानि का दावा नहीं किया जा सकता।
4. किसी भी व्यक्ति अथवा संस्थान पर बुनियादी इल्जाम लगाया गया हो अथवा प्रकाशित किया गया हो तो यह भी मानहानि के अंदर नहीं आता।

मानहानि की सज़ा-

 भारतीय दंड संहिता की धारा 500, धारा 501 तथा धारा 502 के तहत मानहानि के केस पर व्यक्ति को 2 साल की सजा अथवा जुर्माना अथवा दोनों भी लगाया जा सकता है।
मानहानि की सजा
आईपीसी 1860


किसी व्यक्ति के आर्थिक नुकसान होने पर मानहानि के दावे के साथ वह व्यक्ति मुवावजे की मांग भी कर सकता है बशर्ते उसको हुए आर्थिक नुकसान के दस्तावेज उसे न्यायलय में प्रस्तुत करने होंगे।

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